Subhadra Kumari Chauhan Short Biography in Hindi

Subhadra Kumari Chauhan Short Biography in Hindi

झाँसी की रानी, कदम्ब का पेड़ जैसी कविताओं के रचयिता Subhadra Kumari Chauhan का जन्म 16 अगस्त 1904 को हुआ था। Subhdra Kumari Chauhan भारत के स्वतंत्रा संग्राम के दौरान कई बार इनको जेल की यातनाये साहनी पड़ी। उनका जन्म एक निहालपुर नामक गांव में, जो की इलाहाबाद में है एक जमींदार के परिवार में हुआ था। अपने जीवन के छोटे समय से ही वे कविताएँ रचने लगी थीं यही नहीं उनकी रचनाएँ राष्ट्रीयता की भावना से परिपूर्ण होती थी। Subhadra Kumari Chauhan एक रचनाकार होने के साथ-साथ स्वाधीनता संग्राम की सेनानी भी थीं। डॉo मंगला अनुजा की पुस्तक सुभद्रा कुमारी चौहान उनके साहित्यिक व स्वाधीनता संघर्ष के जीवन पर प्रकाश डालती है अंत में 14 फरवरी 1948 को एक कार दुर्घटना में उनका निधन हो गया।

Subhadra Kumari Chauhan
Subhadra Kumari Chauhan
Full Name Subharda Kumari Chauhan
Subhadra Kumari Chauhan Date of Birth 16th August 1904
Subhadra Kumari Chauhan Birth Place Nihalpur, Allahabad, British India (Present Praygraj)
Subhadra Kumari Chauhan Famous Poems Jhansi ki Rani, कदम्ब का पेड़
Subhadra Kumari Chauhan Father Ramnath Singh
Subhadra Kumari Chauhan Children 5
Subhadra Kumari Chauhan Date of Death 14th February 1948

सम्मान (Awards)

  • सेकसरिया पारितोषिक ‘मुकुल’ (कविता-संग्रह) के लिए 1931
  • सेकसरिया पारितोषिक ‘बिखरे मोती’ (कहानी-संग्रह) के लिए (दूसरी बार) ,1932
  • भारतीय डाकतार विभाग ने 6 August,1976 को सुभद्रा कुमारी चौहान के सम्मान में २५ पैसे का एक डाक-टिकट जारी किया है।
  • भारतीय तटरक्षक सेना ने 28 April 2006  को सुभद्राकुमारी चौहान की राष्ट्रप्रेम की भावना को सम्मानित करने के लिए नए नियुक्त एक तटरक्षक जहाज़ को सुभद्रा कुमारी चौहान का नाम दिया है।

कृतियाँ

कहानी संग्रह

  1. बिखरे मोती -१९३२
  2. उन्मादिनी -१९३४
  3. सीधे-साधे चित्र -१९४७
  4. सीधे-साधे चित्र -१९८३ (पूर्व प्रकाशित एवं संकलित-असंकलित समस्त कहानियों का संग्रह; हंस प्रकाशन, इलाहाबाद से प्रकाशित।)

कविता संग्रह ( Subhadra Kumari Chauhan Poems )

  1. मुकुल
  2. त्रिधारा
  3. मुकुल तथा अन्य कविताएँ – (बाल कविताओं को छोड़कर पूर्व प्रकाशित एवं संकलित-असंकलित समस्त कविताओं का संग्रह; हंस प्रकाशन, इलाहाबाद से प्रकाशित।)

बाल-साहित्य

  1. झाँसी की रानी
  2. कदम्ब का पेड़
  3. सभा का खेल

सुभद्रा जी पर केन्द्रित साहित्य

  1. मिला तेज से तेज 

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झाँसी की रानी

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

Opening stanza of Jhansi ki Rani in Hindi

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